राख के ढेर में खोजोगे तो क्या पाओगे |
हाथ मलते ही रहे हो और रह जाओगे ||
बेअदब होके कटेगी न जिन्दगी इक पल |
बा – अदब रहने से चैन सदा पाओगे ||
लक्ष्य लेकर के चलोगे अगर तुम राही बन |
समय के साथ ही मंजिल पे पहुँच जाओगे ||
खिलेंगे फूल बनके , शूल तेरी राहों में |
साथ देगा न कोई फिर भी पहुँच जाओगे ||
बाँध के आये हो मुट्ठी इस जहाँ में तुम |
खोल के हाथ यूँ ही तुम भी चले जाओगे ||
सोच लो जिन्दगी क्या है ? सिर्फ तमाशा है |
दिखा के खेल यूँ ही तुम भी चले जाओगे ||
नीयतें ठीक किसी की नहीं ज़माने में |
एक तुम ही“अतुल”क्या सबको बदल पाओगे ||
प्यार की राह पे चलना है तो काँटों से डर क्या |
कांटे क्यों फूल बनेगे ? तुम चले जाओगे ||
संभल के रहना ज़माने के हसीं फूलों से |
फूल के फेर में काँटों से छले जाओगे ||
हाथ मलते ही रहे हो और रह जाओगे ||
बेअदब होके कटेगी न जिन्दगी इक पल |
बा – अदब रहने से चैन सदा पाओगे ||
लक्ष्य लेकर के चलोगे अगर तुम राही बन |
समय के साथ ही मंजिल पे पहुँच जाओगे ||
खिलेंगे फूल बनके , शूल तेरी राहों में |
साथ देगा न कोई फिर भी पहुँच जाओगे ||
बाँध के आये हो मुट्ठी इस जहाँ में तुम |
खोल के हाथ यूँ ही तुम भी चले जाओगे ||
सोच लो जिन्दगी क्या है ? सिर्फ तमाशा है |
दिखा के खेल यूँ ही तुम भी चले जाओगे ||
नीयतें ठीक किसी की नहीं ज़माने में |
एक तुम ही“अतुल”क्या सबको बदल पाओगे ||
प्यार की राह पे चलना है तो काँटों से डर क्या |
कांटे क्यों फूल बनेगे ? तुम चले जाओगे ||
संभल के रहना ज़माने के हसीं फूलों से |
फूल के फेर में काँटों से छले जाओगे ||