नींद में सपने संजो कर रोज तुमको पा लिया है ,
निज नयन कि न्यून पुतरी में तुम्हें अंकित किया है |
मै तुम्हारा हूँ पुजारी बहुत पहले बन गया ,
मन के मंदिर में सदा मैंने तेरी पूजा किया है |
मन के मंदिर में बसी मूरत कि आभा है विमल ,
अतुल अर्चन ने सदा मूरत का धुंधला पन लिया है |
तुम मिलोगे आस लेकर बाट तेरी जोहता हूँ ,
मेरी किस्मत में तो शायद याद करना ही लिखा है |
प्रणय कि पाती नहीं तुमने लिखी तो क्या हुआ ,
दिल के कागज पर लिखा एक पत्र मैंने पा लिया है|
प्रणय की मैं यह तपस्या उम्र भर करता रहूँगा ,
एक दिन तुम स्वयं कह दोगे तुम्हे अपना लिया है |
निज नयन कि न्यून पुतरी में तुम्हें अंकित किया है |
मै तुम्हारा हूँ पुजारी बहुत पहले बन गया ,
मन के मंदिर में सदा मैंने तेरी पूजा किया है |
मन के मंदिर में बसी मूरत कि आभा है विमल ,
अतुल अर्चन ने सदा मूरत का धुंधला पन लिया है |
तुम मिलोगे आस लेकर बाट तेरी जोहता हूँ ,
मेरी किस्मत में तो शायद याद करना ही लिखा है |
प्रणय कि पाती नहीं तुमने लिखी तो क्या हुआ ,
दिल के कागज पर लिखा एक पत्र मैंने पा लिया है|
प्रणय की मैं यह तपस्या उम्र भर करता रहूँगा ,
एक दिन तुम स्वयं कह दोगे तुम्हे अपना लिया है |
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